भारत के इस्पात उद्योग को चालू वित्त वर्ष 2026-27 की पहली छमाही में देश के भीतर बढ़ती खपत से स्पष्ट बढ़त मिली है। उद्योग से जुड़े आंकड़ों और विशेषज्ञों के अनुसार, निर्माण, बुनियादी ढांचा परियोजनाओं, ऑटोमोबाइल निर्माण तथा पूंजीगत वस्तुओं से जुड़े क्षेत्रों में लगातार बढ़ती मांग ने स्टील उत्पादकों के लिए अनुकूल माहौल तैयार किया है।
विशेषज्ञों का मानना है कि सरकार द्वारा सड़क, रेलवे, आवास और शहरी विकास से जुड़ी योजनाओं पर जोर दिए जाने से इस्पात की खपत में निरंतर इजाफा देखा जा रहा है। साथ ही, निर्माण क्षेत्र में तेजी और रियल एस्टेट परियोजनाओं के पुनरुद्धार ने भी घरेलू मांग को सहारा दिया है। इसके अतिरिक्त, वाहन उद्योग में उत्पादन बढ़ने और उपभोक्ता मांग में सुधार से भी स्टील की खपत पर सकारात्मक असर पड़ा है।
उद्योग विश्लेषकों के अनुसार, घरेलू बाजार की यह मजबूती ऐसे समय में सामने आई है जब वैश्विक स्तर पर इस्पात क्षेत्र को आयात-निर्यात से जुड़ी चुनौतियों और अंतरराष्ट्रीय कीमतों में उतार-चढ़ाव का सामना करना पड़ रहा है। ऐसे में घरेलू खपत का बढ़ना भारतीय इस्पात कंपनियों के लिए राहत की खबर मानी जा रही है, क्योंकि इससे उन्हें वैश्विक अनिश्चितताओं के बावजूद उत्पादन क्षमता का बेहतर उपयोग करने और लाभप्रदता बनाए रखने में मदद मिल रही है।
सरकार की ओर से भी पीएलआई योजना और बुनियादी ढांचे पर खर्च बढ़ाने जैसे कदमों के जरिए इस्पात क्षेत्र को प्रोत्साहन देने के प्रयास जारी हैं। उद्योग जगत के जानकारों का कहना है कि यदि यह रुझान आगे भी बना रहता है, तो वित्त वर्ष की दूसरी छमाही में भी इस्पात उत्पादन और खपत में बढ़ोतरी की उम्मीद की जा सकती है।
हालांकि कुछ विशेषज्ञों ने कच्चे माल की कीमतों में संभावित बढ़ोतरी और वैश्विक आर्थिक अनिश्चितता को लेकर सतर्कता बरतने की सलाह भी दी है। इसके बावजूद, मौजूदा आंकड़े यह संकेत देते हैं कि घरेलू मांग आने वाले महीनों में भारतीय इस्पात उद्योग के लिए मुख्य संचालक शक्ति बनी रहेगी, जिससे देश की आर्थिक वृद्धि दर को भी अप्रत्यक्ष रूप से बल मिलने की संभावना है।
छवि: PIB
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