भारत की अंतरिक्ष अर्थव्यवस्था अगले 7-8 साल में 40-45 अरब डॉलर तक पहुंचने का अनुमान, Dr. Jitendra Singh ने निजी निवेश बढ़ाने पर दिया जोर
नई दिल्ली। देश का अंतरिक्ष क्षेत्र आने वाले वर्षों में आर्थिक विकास का एक बड़ा स्तंभ बनकर उभरने वाला है। केंद्रीय मंत्री Dr. Jitendra Singh ने हाल ही में एक कार्यक्रम के दौरान बताया कि भारत की अंतरिक्ष अर्थव्यवस्था अगले सात से आठ वर्षों में 40 से 45 अरब अमेरिकी डॉलर के आंकड़े को पार कर सकती है। उन्होंने इस तीव्र वृद्धि का श्रेय प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की उस नीतिगत पहल को दिया, जिसके तहत कुछ साल पहले अंतरिक्ष क्षेत्र को निजी कंपनियों के लिए खोला गया था।
Dr. Jitendra Singh ने कहा कि पहले यह क्षेत्र पूरी तरह सरकारी एजेंसियों के दायरे में सीमित था, लेकिन सुधारों के बाद स्टार्टअप्स और निजी उद्यमों की भागीदारी में उल्लेखनीय बढ़ोतरी दर्ज की गई है। उनके अनुसार, निजी क्षेत्र की सक्रिय भूमिका ही इस उद्योग की रफ्तार को और तेज करने वाला सबसे बड़ा कारक साबित होगी। मंत्री ने यह भी रेखांकित किया कि सरकार का लक्ष्य केवल उपग्रह प्रक्षेपण तक सीमित नहीं है, बल्कि अंतरिक्ष आधारित तकनीकों को कृषि, मौसम पूर्वानुमान, दूरसंचार, आपदा प्रबंधन और डिजिटल संपर्क जैसे क्षेत्रों से जोड़कर आम नागरिकों तक इसका लाभ पहुंचाना है।
उन्होंने यह उम्मीद भी जताई कि जैसे-जैसे निजी निवेश बढ़ेगा, वैसे-वैसे रोजगार सृजन, तकनीकी नवाचार और वैश्विक बाजार में भारत की हिस्सेदारी भी मजबूत होती जाएगी। मंत्री के मुताबिक, अंतरिक्ष क्षेत्र अब केवल वैज्ञानिक उपलब्धियों का प्रतीक नहीं रहा, बल्कि यह आर्थिक विकास और आत्मनिर्भरता की दिशा में एक महत्वपूर्ण कड़ी बन चुका है।
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि सरकार की नीतियां इसी तरह निवेशक-अनुकूल बनी रहीं, तो भारत आने वाले दशक में वैश्विक अंतरिक्ष उद्योग में एक प्रमुख खिलाड़ी के रूप में अपनी पहचान और मजबूत कर सकता है। सरकार लगातार नियामकीय ढांचे को सरल बनाने और विदेशी व घरेलू निवेशकों को आकर्षित करने के लिए नई योजनाओं पर काम कर रही है, जिससे यह क्षेत्र आने वाले समय में देश की अर्थव्यवस्था में और बड़ा योगदान दे सके।
छवि: PIB
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