Ayush सेक्टर बना भारत की सबसे तेज़ रफ्तार सेवा अर्थव्यवस्थाओं में शुमार, RIS रिपोर्ट में 36.92 बिलियन डॉलर के कारोबार का खुलासा
भारत का Ayush क्षेत्र देश की सेवा अर्थव्यवस्था में एक चमकते सितारे के रूप में उभर आया है। Research and Information System for Developing Countries (RIS) द्वारा किए गए एक ताज़ा अध्ययन में सामने आया है कि Ayush आधारित उद्योग अब करीब 36.92 बिलियन अमेरिकी डॉलर की विशाल अर्थव्यवस्था बन चुका है। यह आंकड़ा साफ दर्शाता है कि पारंपरिक भारतीय चिकित्सा पद्धतियां — जिनमें Ayurveda, Yoga, Unani, Siddha और Homeopathy शामिल हैं — अब सिर्फ स्वास्थ्य सेवा तक सीमित न रहकर एक मजबूत आर्थिक स्तंभ बनती जा रही हैं।
रिपोर्ट के अनुसार, बीते कुछ वर्षों में Ayush से जुड़े उत्पादों, दवाओं, उपचार केंद्रों और वेलनेस सेवाओं की मांग में जबरदस्त उछाल दर्ज किया गया है। इस वृद्धि के पीछे घरेलू बाजार के साथ-साथ अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी प्राकृतिक और समग्र स्वास्थ्य समाधानों के प्रति बढ़ती जागरूकता को अहम वजह माना जा रहा है। कोविड महामारी के बाद दुनिया भर में इम्यूनिटी बढ़ाने वाले और रोकथाम आधारित उपचारों की तरफ रुझान बढ़ा है, जिसका सीधा फायदा भारतीय पारंपरिक चिकित्सा उद्योग को मिला है।
विशेषज्ञों का मानना है कि सरकार की नीतिगत पहलों, Ayush मंत्रालय द्वारा चलाई जा रही योजनाओं और वैश्विक स्तर पर योग व आयुर्वेद के प्रचार-प्रसार ने इस क्षेत्र को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। साथ ही, स्टार्टअप्स और निजी निवेशकों की बढ़ती दिलचस्पी ने भी इस उद्योग को गति दी है, जिससे रोजगार सृजन और निर्यात दोनों में इजाफा हुआ है।
RIS की इस रिपोर्ट को भारतीय आर्थिक परिदृश्य के लिए एक सकारात्मक संकेत माना जा रहा है, क्योंकि यह दर्शाता है कि पारंपरिक ज्ञान को आधुनिक व्यावसायिक ढांचे के साथ जोड़कर एक टिकाऊ और लाभकारी उद्योग खड़ा किया जा सकता है। आने वाले वर्षों में इस क्षेत्र के और अधिक तेजी से विस्तार होने की उम्मीद जताई जा रही है, जिससे भारत वैश्विक वेलनेस बाजार में अपनी पकड़ और मजबूत कर सकेगा।
छवि: Karntheking (Wikimedia Commons)
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