NHRC का बड़ा एक्शन: MP-Rajasthan सीमावर्ती जिलों से Maharashtra में बेटियों की तस्करी मामले पर स्वत: संज्ञान
राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (NHRC) ने एक गंभीर मामले में स्वत: संज्ञान लेते हुए जांच शुरू कर दी है। यह मामला मध्य प्रदेश और राजस्थान के सीमा से सटे जिलों से नाबालिग बच्चियों को महाराष्ट्र के विभिन्न शहरों में बेचे जाने और तस्करी किए जाने से जुड़ा है। मीडिया में प्रकाशित रिपोर्टों के आधार पर आयोग ने इस संवेदनशील विषय को गंभीरता से लेते हुए संबंधित राज्यों से जवाब-तलब करने का फैसला किया है।
जानकारी के अनुसार, मध्य प्रदेश और राजस्थान की सीमा से लगे कुछ पिछड़े और आर्थिक रूप से कमजोर जिलों में गरीबी तथा अन्य सामाजिक कारणों के चलते बालिकाओं को तस्करों के हाथों बेचा जा रहा था। इन बच्चियों को बाद में महाराष्ट्र के विभिन्न शहरी इलाकों में भेजा जा रहा था, जहां उनका शोषण किए जाने की आशंका जताई गई है। इस तरह की घटनाएं मानव तस्करी और बाल अधिकार हनन की गंभीर श्रेणी में आती हैं, जो न केवल कानूनी बल्कि सामाजिक दृष्टि से भी अत्यंत चिंताजनक मानी जा रही हैं।
NHRC ने इस पूरे प्रकरण को देखते हुए मध्य प्रदेश, राजस्थान और महाराष्ट्र की सरकारों से विस्तृत रिपोर्ट तलब की है। आयोग ने संबंधित राज्यों के मुख्य सचिवों और पुलिस महानिदेशकों को निर्देश जारी करते हुए पूछा है कि इस तस्करी रैकेट को रोकने के लिए अब तक क्या कदम उठाए गए हैं और पीड़ित बालिकाओं को बचाने तथा उनके पुनर्वास के लिए क्या व्यवस्था की जा रही है।
आयोग ने अपने बयान में स्पष्ट किया कि यदि समाचार रिपोर्टों में उल्लेखित तथ्य सही पाए जाते हैं, तो यह बच्चों के मौलिक अधिकारों का गंभीर उल्लंघन माना जाएगा। मानवाधिकार संगठनों का मानना है कि सीमावर्ती जिलों में सक्रिय तस्करी गिरोह गरीब परिवारों को लालच देकर या दबाव में डालकर बच्चियों को खरीदते हैं और फिर उन्हें बड़े शहरों में भेज देते हैं, जहां उनकी पहचान करना और सुरक्षित बचाना मुश्किल हो जाता है।
विशेषज्ञों का कहना है कि इस तरह के मामलों में राज्यों के बीच समन्वय की कमी, सीमा क्षेत्रों में निगरानी तंत्र का अभाव और सामाजिक जागरूकता की कमी प्रमुख कारण रहे हैं। NHRC द्वारा लिया गया यह संज्ञान आने वाले दिनों में संबंधित राज्यों की पुलिस और प्रशासनिक तंत्र पर कार्रवाई का दबाव बढ़ा सकता है। आयोग की ओर से मांगी गई रिपोर्ट मिलने के बाद आगे की कार्यवाही तय की जाएगी, जिसमें दोषियों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई और पीड़ित बालिकाओं के पुनर्वास पर विशेष ध्यान दिए जाने की संभावना जताई जा रही है।
इस मामले ने एक बार फिर देश में बाल सुरक्षा और मानव तस्करी रोकथाम से जुड़े कानूनों की प्रभावशीलता पर सवाल खड़े कर दिए हैं। सामाजिक कार्यकर्ताओं ने मांग की है कि सीमावर्ती इलाकों में विशेष निगरानी दल तैनात किए जाएं और गरीब परिवारों के लिए ऐसी योजनाएं बनाई जाएं जिससे वे तस्करों के झांसे में न आएं।
छवि: 112 Uttar Pradesh (Pexels)
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