मेट्रो नेटवर्क विस्तार: 2014 के 248 किलोमीटर से बढ़कर अब लगभग 1,200 किलोमीटर हुआ भारत का मेट्रो तंत्र, PM ने दी जानकारी
भारत में शहरी परिवहन के क्षेत्र में हुई बड़ी प्रगति की चर्चा करते हुए प्रधानमंत्री ने देशभर में फैले मेट्रो नेटवर्क के तेजी से हुए विस्तार का ब्यौरा साझा किया। उन्होंने बताया कि वर्ष 2014 में जहां देश में मेट्रो रेल सेवा महज 248 किलोमीटर के दायरे तक सीमित थी, वहीं आज यह आंकड़ा बढ़कर लगभग 1,200 किलोमीटर तक जा पहुंचा है। यह उपलब्धि पिछले एक दशक में शहरी बुनियादी ढांचे पर दिए गए विशेष ध्यान का परिणाम बताई जा रही है।
सरकार की ओर से इस विस्तार को देश के बड़े और मंझोले शहरों में यातायात व्यवस्था को आधुनिक बनाने की दिशा में एक अहम कदम माना जा रहा है। पिछले कुछ वर्षों में कई नए शहरों को मेट्रो नेटवर्क से जोड़ा गया है, जबकि पुराने मेट्रो रूट्स का भी लगातार विस्तार किया गया है। इससे न केवल लाखों यात्रियों को रोजाना आवागमन में सुविधा मिल रही है, बल्कि सड़कों पर वाहनों के दबाव में भी कमी आई है, जिसका सीधा असर प्रदूषण नियंत्रण और ईंधन की बचत पर पड़ा है।
विशेषज्ञों का मानना है कि मेट्रो नेटवर्क के इस तेज विस्तार से शहरी क्षेत्रों में रोजगार के नए अवसर भी पैदा हुए हैं, साथ ही निर्माण, इंजीनियरिंग और संबद्ध उद्योगों को भी गति मिली है। कई शहरों में मेट्रो परियोजनाओं के पूरा होने से रियल एस्टेट और स्थानीय व्यापार को भी लाभ पहुंचा है।
सरकारी सूत्रों के अनुसार, आने वाले वर्षों में मेट्रो नेटवर्क को और विस्तृत करने की योजना है, जिसके तहत कई नए शहरों को इस सुविधा से जोड़ा जाएगा और मौजूदा रूट्स को भी आगे बढ़ाया जाएगा। इस पहल को देश में सार्वजनिक परिवहन को आधुनिक, सुरक्षित और पर्यावरण अनुकूल बनाने की व्यापक रणनीति का हिस्सा बताया जा रहा है।
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