राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (NHRC) ने उत्तर प्रदेश के Ghaziabad जिले से जुड़े एक गंभीर और चिंताजनक मामले में स्वतः संज्ञान लिया है। आयोग के समक्ष यह जानकारी आई कि जिले के कई सरकारी और निजी अस्पतालों में पिछले सात महीनों के दौरान गर्भावस्था से जुड़े इलाज अथवा प्रसव के दौरान कुल 24 महिलाओं की जान चली गई। इन मौतों को लेकर उठे सवालों के बाद आयोग ने इसे गंभीरता से लेते हुए स्वयं कार्रवाई शुरू करने का फैसला किया।
जानकारी के मुताबिक, ये सभी घटनाएं अलग-अलग समय पर अलग-अलग अस्पतालों में सामने आईं, जहां महिलाएं या तो प्रसव पीड़ा के दौरान या गर्भावस्था से संबंधित जटिलताओं के इलाज के दौरान दम तोड़ गईं। इतनी बड़ी संख्या में महिलाओं की मौत ने स्वास्थ्य व्यवस्था की कार्यप्रणाली और अस्पतालों में दी जा रही चिकित्सा सुविधाओं की गुणवत्ता को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
NHRC ने इस मुद्दे को मानवाधिकार उल्लंघन से जोड़कर देखा है, क्योंकि स्वास्थ्य सेवाओं का उचित और समय पर न मिलना जीवन के अधिकार के हनन के समान माना जाता है। आयोग का मानना है कि अगर यह आंकड़ा सही पाया जाता है, तो यह न केवल अस्पताल प्रशासन बल्कि राज्य के स्वास्थ्य विभाग की भी बड़ी चूक को दर्शाता है।
इस पूरे प्रकरण में आयोग ने संबंधित अधिकारियों से विस्तृत रिपोर्ट तलब करने का निर्णय लिया है। इसमें यह पता लगाने की कोशिश की जाएगी कि आखिर किन कारणों से इतनी बड़ी संख्या में महिलाओं की मौत हुई, क्या अस्पतालों में पर्याप्त चिकित्सा संसाधन और प्रशिक्षित स्टाफ मौजूद थे, और क्या समय पर उचित इलाज उपलब्ध कराया गया था या नहीं।
स्थानीय स्तर पर भी इस मामले को लेकर चिंता जताई जा रही है। स्वास्थ्य क्षेत्र से जुड़े विशेषज्ञों का कहना है कि मातृ मृत्यु दर में इस तरह की बढ़ोतरी चिकित्सा व्यवस्था में मौजूद खामियों की ओर इशारा करती है। कई मामलों में यह भी आशंका जताई जा रही है कि समय पर सही निर्णय न लिए जाने, लापरवाही या संसाधनों की कमी के चलते ऐसी घटनाएं हुई हों।
आयोग द्वारा मांगी गई रिपोर्ट में अस्पतालों की स्थिति, उपलब्ध चिकित्सा सुविधाओं, डॉक्टरों व नर्सिंग स्टाफ की संख्या, तथा प्रत्येक मामले में हुई मौत के पीछे के वास्तविक कारणों का उल्लेख किया जाना अपेक्षित है। इसके अलावा यह भी देखा जाएगा कि क्या पीड़ित परिवारों को किसी प्रकार की सहायता या मुआवजा प्रदान किया गया है अथवा नहीं।
इस मामले ने एक बार फिर से सरकारी और निजी स्वास्थ्य सेवाओं की जवाबदेही को लेकर बहस छेड़ दी है। जानकारों का कहना है कि अगर समय रहते उचित कदम नहीं उठाए गए, तो भविष्य में इस तरह की घटनाएं दोबारा हो सकती हैं। फिलहाल सभी की निगाहें NHRC की जांच रिपोर्ट पर टिकी हैं, जिससे यह स्पष्ट हो सकेगा कि वास्तव में इन मौतों के पीछे क्या कारण रहे और इसके लिए जिम्मेदार कौन है।
छवि: Jonathan Borba (Pexels)
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