राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (NHRC) ने उत्तर प्रदेश के बलिया जिले से सामने आई एक दुखद घटना का स्वतः संज्ञान लिया है, जिसमें एक स्कूल भवन की छत के नजदीक से गुजर रही 11 किलोवॉट क्षमता की बिजली लाइन की चपेट में आने से 12 वर्ष के एक छात्र की जान चली गई थी। आयोग ने इस मामले को गंभीरता से लेते हुए संबंधित अधिकारियों से विस्तृत जवाब तलब किया है।
मीडिया रिपोर्ट्स के हवाले से यह जानकारी सामने आई कि स्कूल की इमारत के ठीक ऊपर से हाई-वोल्टेज बिजली लाइन गुजर रही थी, जो प्रशासनिक और सुरक्षा मानकों की दृष्टि से एक गंभीर लापरवाही मानी जा रही है। बताया जा रहा है कि नन्हा छात्र किसी वजह से छत के पास पहुंचा और अनजाने में बिजली के तारों के संपर्क में आ गया, जिससे उसकी मौके पर ही मौत हो गई। इस हादसे ने इलाके में सनसनी फैला दी है और स्थानीय लोगों में प्रशासन के प्रति गहरा आक्रोश देखने को मिल रहा है।
NHRC ने अपने बयान में कहा है कि यदि यह खबर सही पाई जाती है तो यह बच्चे के जीवन के मौलिक अधिकार का घोर उल्लंघन है। आयोग का मानना है कि स्कूल परिसर में इस तरह की खतरनाक बिजली लाइन का होना न केवल बड़ी लापरवाही है, बल्कि यह दर्शाता है कि संबंधित विभागों ने समय रहते इस खतरे की पहचान कर उचित कदम नहीं उठाए। आयोग ने उत्तर प्रदेश के मुख्य सचिव और राज्य के पुलिस महानिदेशक को नोटिस भेजकर इस पूरे प्रकरण पर विस्तृत रिपोर्ट मांगी है।
आयोग ने अपने निर्देश में स्पष्ट किया है कि रिपोर्ट में यह भी बताया जाए कि इस तरह की जानलेवा लापरवाही के लिए कौन-कौन जिम्मेदार अधिकारी या विभाग हैं, तथा पीड़ित परिवार को अब तक क्या राहत और मुआवजा प्रदान किया गया है। इसके अलावा आयोग ने यह भी जानना चाहा है कि भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने के लिए बिजली विभाग और शिक्षा विभाग की ओर से क्या ठोस कदम उठाए जा रहे हैं।
इस घटना के बाद एक बार फिर स्कूलों और शैक्षणिक संस्थानों के आसपास बिजली लाइनों की सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल खड़े हो गए हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि देशभर में कई स्कूल भवन ऐसे इलाकों में बने हैं जहां हाई-टेंशन लाइनें बेहद करीब से गुजरती हैं, जो बच्चों की सुरक्षा के लिए लगातार खतरा बनी रहती हैं। स्थानीय प्रशासन से मांग की जा रही है कि इस तरह की खतरनाक बिजली लाइनों को तत्काल प्रभाव से शिफ्ट किया जाए ताकि भविष्य में किसी और मासूम की जान न जाए।
फिलहाल पूरे मामले की जांच जारी है और आयोग द्वारा मांगी गई रिपोर्ट आने के बाद ही यह स्पष्ट हो पाएगा कि इस हादसे के लिए वास्तव में किसे जिम्मेदार ठहराया जाएगा। पीड़ित परिवार और स्थानीय समुदाय इस मामले में त्वरित न्याय और सख्त कार्रवाई की मांग कर रहे हैं।
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