देश में दूरसंचार क्षेत्र की आने वाली पीढ़ी की तकनीकों को रफ्तार देने के मकसद से सेंटर फॉर डेवलपमेंट ऑफ टेलीमैटिक्स यानी C-DOT ने एक बड़ा कदम उठाने का फैसला किया है। संस्था अब वाराणसी स्थित IIT (BHU) परिसर में अपना छठा सेंटर ऑफ एक्सीलेंस खोलने जा रही है। यह पहल भारत सरकार के दूरसंचार विभाग के अंतर्गत काम करने वाली इस प्रमुख शोध संस्था की उस रणनीति का हिस्सा है, जिसके तहत देशभर के प्रतिष्ठित तकनीकी संस्थानों के साथ मिलकर अत्याधुनिक संचार तकनीकों पर शोध कार्य को बढ़ावा दिया जा रहा है।
इस नए केंद्र की स्थापना से वाराणसी और आसपास के क्षेत्र में तकनीकी नवाचार को नई दिशा मिलने की उम्मीद जताई जा रही है। IIT (BHU) पहले से ही इंजीनियरिंग और तकनीकी शिक्षा के क्षेत्र में देश के अग्रणी संस्थानों में गिना जाता है, और अब C-DOT के सहयोग से यहां अगली पीढ़ी की दूरसंचार प्रौद्योगिकियों पर गहन अनुसंधान किया जा सकेगा। इसमें 5G से आगे की तकनीक, नेटवर्क सुरक्षा, और डिजिटल संचार से जुड़े अन्य महत्वपूर्ण पहलुओं पर काम होने की संभावना है।
C-DOT पहले से ही देश के कई प्रमुख शैक्षणिक संस्थानों में इस तरह के उत्कृष्टता केंद्र संचालित कर रहा है, जहां छात्रों, शोधकर्ताओं और उद्योग विशेषज्ञों को एक मंच पर लाकर नई तकनीकों के विकास पर काम किया जाता है। वाराणसी में बनने वाला यह छठा केंद्र इस श्रृंखला की अगली कड़ी साबित होगा। विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह के सहयोगात्मक प्रयासों से न केवल शैक्षणिक संस्थानों को शोध के लिए बेहतर संसाधन मिलते हैं, बल्कि देश की आत्मनिर्भरता की दिशा में भी यह एक महत्वपूर्ण कदम है, खासकर तब जब वैश्विक स्तर पर दूरसंचार तकनीकों में भारत अपनी स्वदेशी क्षमताओं को मजबूत करने में जुटा है।
सूत्रों के अनुसार, इस केंद्र के माध्यम से छात्रों और शोधार्थियों को वास्तविक समय की परियोजनाओं पर काम करने का अवसर मिलेगा, जिससे उन्हें उद्योग जगत की जरूरतों के अनुसार प्रशिक्षित किया जा सकेगा। यह पहल दूरसंचार क्षेत्र में भारत को आत्मनिर्भर बनाने के सरकार के व्यापक लक्ष्य के अनुरूप भी मानी जा रही है। आने वाले समय में इस केंद्र से निकलने वाले शोध परिणाम देश की संचार व्यवस्था को और अधिक सक्षम व सुरक्षित बनाने में अहम भूमिका निभा सकते हैं।
छवि: PIB
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