सुप्रीम कोर्ट के विद्वान अधिवक्ता ने खोल दिया चुनाव आयोग की पोल, बढ़ सकती है चुनाव आयुक्त की मुश्किलें
नई दिल्ली (रिपोर्ट-क़मरुद्दीन सिद्दीक़ी)। चुनावी प्रक्रिया में पारदर्शिता, निष्पक्षता और मतदाताओं के अधिकारों की रक्षा को लेकर सुप्रीम कोर्ट के वरिष्ठ अधिवक्ता और ‘सेव कंस्टीटूशन’ संस्था के प्रमुख महमूद प्राचा का संघर्ष अब एक नए और निर्णायक मोड़ पर पहुँच गया है। चुनाव आयोग के अधिकारियों पर चुनावी धांधली और अनियमितताओं के गंभीर आरोपों के बीच दिल्ली की पटियाला हाउस कोर्ट ने बड़ा कदम उठाया है।

कोर्ट ने दिल्ली पुलिस को लगाई फटकार, नई जांच रिपोर्ट का दिया आदेश
पटियाला हाउस कोर्ट (जुडीशियल मजिस्ट्रेट फर्स्ट क्लास कौतुक भारद्वाज) ने सीनियर एडवोकेट महमूद प्राचा की याचिका पर सुनवाई करते हुए पार्लियामेंट स्ट्रीट थाना के जांच अधिकारी (IO) को फ्रेश एक्शन टेकन रिपोर्ट (ATR) दाखिल करने का सख्त निर्देश दिया है।
अदालत ने पुलिस द्वारा पूर्व में सौंपी गई ATR में गंभीर कमियां पाईं। कोर्ट ने माना कि शिकायतकर्ता के बयान दर्ज किए बिना और उन्हें साक्ष्य (Evidence) प्रस्तुत करने का अवसर दिए बिना जांच रिपोर्ट दाखिल नहीं की जा सकती थी। इसी आधार पर अदालत ने जांच अधिकारी को महमूद प्राचा का बयान दर्ज करने और उनके द्वारा प्रस्तुत सभी सबूतों को ध्यान में रखते हुए नई रिपोर्ट पेश करने का आदेश दिया है। इस मामले की अगली सुनवाई 11 नवंबर को तय की गई है।
चुनाव आयोग पर गंभीर आरोप: बोगस वोटिंग और योग्य मतदाताओं के नाम हटाने की शिकायत
महमूद प्राचा द्वारा दायर याचिका में आरोप लगाया गया है कि चुनाव आयोग के अधिकारियों ने लोक प्रतिनिधित्व अधिनियम, 1951 (Representation of the People Act, 1951) और इलेक्टोरल रजिस्ट्रेशन ऑफिसर्स हैंडबुक, 2023 का खुला उल्लंघन किया है।
याचिका में दावा किया गया है कि दिल्ली समेत देश के कई राज्यों में:
योग्य और वैध मतदाताओं के नाम अवैध रूप से मतदाता सूची से हटाए गए।
फर्जी (बोगस) वोटिंग को बढ़ावा दिया गया और चुनावी नियमों का घोर उल्लंघन किया गया।
प्रेस क्लब में सबूत पेश कर आयोग को घेरा, देशद्रोह का केस दर्ज करने की मांग
आज दिल्ली स्थित प्रेस क्लब ऑफ इंडिया में पत्रकारों को संबोधित करते हुए सुप्रीम कोर्ट के वरिष्ठ अधिवक्ता महमूद प्राचा ने चुनाव आयोग द्वारा की गई कथित धांधली और गड़बड़ियों के दस्तावेज व प्रमाण मीडिया के सामने रखे। प्राचा का आरोप है कि चुनाव आयोग अपने ही नियमों की अनदेखी कर सत्ताधारी दल को अनुचित लाभ पहुँचाने का काम कर रहा है, जो संविधान और लोकतांत्रिक ढांचे पर सीधा हमला है।
उन्होंने देश के मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ गंभीर आरोप लगाते हुए उनके तत्काल निष्कासन और देश की जनता के वोटिंग अधिकार पर डाका डालने के आरोप में उन पर देशद्रोह की धाराओं के तहत आपराधिक मामला दर्ज करने की मांग की। SIR की समय-सीमा में निर्वाचन आयोग ने Andhra Pradesh और Meghalaya के लिए दी राहत
दमन चक्र के खिलाफ लगातार संघर्ष
यह पहला मौका नहीं है जब एडवोकेट प्राचा सत्ता और व्यवस्था के खिलाफ मुखर हुए हैं:
दिसंबर 2020 की रेड
दिल्ली दंगों के पीड़ितों की मुफ्त पैरवी करने और उन्हें न्याय दिलाने के कारण दिसंबर 2020 में दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल ने महमूद प्राचा के कार्यालय पर छापेमारी की थी। इस कार्रवाई में उनका लैपटॉप और निजी दस्तावेज जब्त करने का प्रयास किया गया, जिसकी कानूनी बिरादरी में चौतरफा निंदा हुई।
महिला वकील फोरम व बार एसोसिएशन का विरोध: दिल्ली हाईकोर्ट महिला वकील फोरम और दिल्ली उच्च न्यायालय बार एसोसिएशन (DHCBA) ने इस छापेमारी को वकीलों को डराने और हतोत्साहित करने की साजिशन कार्रवाई करार दिया था। चुनाव आयोग: दो आयुक्तों ने SIR प्रक्रिया पर 14 बार जताई आपत्ति, EC ने दी सफाई
10 अक्टूबर को जंतर-मंतर पर विशाल प्रदर्शन का आह्वान
ईवीएम (EVM) के स्थान पर बैलेट पेपर (Ballot Paper) से चुनाव कराने की मांग को लेकर प्राचा लगातार जनांदोलन खड़ा कर रहे हैं। उन्होंने पत्रकारों और देश की जनता को संबोधित करते हुए कहा:
“संविधान हमारे लोकतंत्र की आत्मा है और आत्मा के साथ खिलवाड़ बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। मैं इस भ्रष्ट व्यवस्था और संविधान की रक्षा के लिए अपनी अंतिम सांस तक लड़ाई लड़ूंगा। मुझे हमारी न्यायपालिका पर पूरा विश्वास है कि वह लोकतंत्र के दुश्मनों और जनमत पर डाका डालने वालों को सजा जरूर देगी।”
इसी कड़ी में महमूद प्राचा ने देश के सभी राजनीतिक दलों, नागरिक संगठनों (Civil Society) और आम नागरिकों से 10 अक्टूबर 2026 को दिल्ली के जंतर-मंतर पर एकत्र होकर चुनाव आयोग के खिलाफ आवाज बुलंद करने की अपील की है।
Discover more from United India Live
Subscribe to get the latest posts sent to your email.




